Monday, 30 October 2017

8. बच्चों की जादुई मालिश






*बच्चों की जादुई मालिश कैसे करे ?
जब घर में नन्हे-मुन्ने की किलकारियाँ गुँजती हैं तो मन में प्रसन्नता का अहसास होता है। लेकिन जब वह लगातार रोता है तो कई बार माँ भी नहीं समझ पाती कि उसे क्या तकलीफ है।

नन्हें शिशु को संभालना कोई आसान बात नहीं है। खासकर तब जब वह एक या दो हफ्ते का हो। नन्हे शिशु की देखरेख करने में घर की बड़ी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

बच्चा जब लगातार रोता है तो घर की बड़ी-बूढ़ी महिलाएँ झट से भाँप जाती हैं कि उसके पेट में तकलीफ है या उसकी पसलियों में दर्द है।

मालिश से बच्चे के शरीर की थकी हुई माँसपेशियों को आराम मिलता है। मालिश बच्चों को कई तकलीफों जैसे पसलियों का दर्द, थकान आदि से फायदा पहुँचाती है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और बच्चे के शरीर का विकास तेजी से होता है।

घर में अगर नानी-दादी हों तो वे बच्चों की हर रोज मालिश करने की सलाह देती हैं। इससे बच्चे का शरीर मजबूत बनता है लेकिन आजकल की महिलाएँ तो बच्चों के थोड़ा सा भी रोने पर घबरा जाती हैं व तरह-तरह की चिंताएँ करने लगती हैं।

कई महिलाएँ इस डर के मारे बच्चों की मालिश नहीं करती हैं कि उससे उनके बच्चे को कहीं कोई नुकसान न हो जाए।

मालिश से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता पर इसके लिए आवश्यक है कि मालिश सही तरीके से की जाए।

मालिश के साथ बच्चे की गेहूँ के आटे व तेल की लोई भी की जाती है। इससे उनके शरीर के अनचाहें बाल भी निकल जाते है तथा रक्तसंचार भी बढ़ता है।

* शुरुआत कब से करें?
सामान्यत: बच्चे के जन्म के पहले हफ्ते के बाद से ही मालिश आरंभ कर देनी चाहिए तथा 18 माह तक जारी रखनी चाहिए। सुबह एक बार बच्चे को नहलाने से पहले तथा शाम को उसके सोने से पहले मालिश करनी चाहिए।

मालिश का कोई विशेष मौसम नहीं होता है। यह हर मौसम में की जा सकती है। गर्मियों में दिन में दो बार तथा सर्दियों में तीन बार मालिश करना उचित रहता है।



* मालिश का सही तरीका
माँ अपने दोनों पैर फैलाकर बच्चे को पैरों के बीच में आरामदायक मुद्रा में ‍‍लिटाएँ। फिर हाँथों में तेल लेकर बच्चों के पैरों की तरफ से मालिश शुरू करते हुए छाती व हाथ ‍तक ले जानी चाहिए। उसके बाद बच्चे को पीठ के बल लिटाकर मालिश का यही तरीका आजमाएँ। अंत में बच्चे के चेहरे व सिर की मालिश करनी चाहिए।

* फायदेमंद है मालिश
  • मालिश से बच्चे के शरीर की थकी हुई माँसपेशियों को आराम मिलता है। मालिश बच्चों को कई तकलीफों जैसे पसलियों का दर्द, थकान आदि से फायदा पहुँचाती है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और बच्चे के शरीर का विकास तेजी से होता है। मालिश से ‍शिशु की त्वचा में स्निग्धता व सुंदरता भी आती है 
  • मुझे शिशु की मालिश किस तरह करनी चाहिए?
  • शिशुओं को एक ही तरह के नियम और बार-बार उन्हें दोहराया जाना अच्छा लगता है। इसलिए अगर आप हर बार शिशु की एक ही तरीके से मालिश करेंगी, तो वह समझ जाएगा कि आगे क्या होने वाला है और वह मालिश का और अधिक आनंद लेगा।
  • शिशु की मालिश की शुरुआत उसके पैरों से करें और फिर शरीर से करते हुए सिर की मालिश से समाप्त करें। टांगों से शुरुआत करना सही रहता है, क्योंकि आपके शिशु को नैपी बदलने के दौरान टांगों को छुए जाने की आदत होती है।
  • क्रीम या तेल की कुछ बूंदें अपने हाथ में लें। दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ कर तेल या क्रीम को थोड़ा गर्म करें।
  • बेहद सौम्यता से इसे शिशु की त्वचा पर लगाएं। शुरुआत टांगों से करें।
  • नीचे से मालिश करते हुए टांगों के ऊपर की तरफ जाएं। आप सौम्यता से दूध दुहने के अंदाज में उसकी जांघों से नीचे पैरों की उंगलियों तक जाएं।
  • यही तरीका उसकी बाजूओं और हाथों पर आजमाएं। उसके कंधों से शुरु करते हुए नीचे उंगलियों तक आएं।
  • शिशु के पैरों की उंगलियां एक-एक करके अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच लेकर सौम्यता से बाहर की ओर खींचें। यही प्रक्रिया हाथों की उंगलियों पर भी दोहराइए। शिशु की उंगलियों के जोड़ों को चटकाने का प्रयास न करें, इससे उसे दर्द या चोट पहुंच सकती है।
  • शिशु की छाती और पेट पर घड़ी की सुई की दिशा में गोलाकार में मालिश कीजिए। शिशु के पेट पर हल्के दबाव के साथ की गई गोलाकार मालिश उसके पाचन तंत्र में सुधार ला सकती है।
  • घुटने के नीचे की तरफ से शिशु की टांगों को पकड़ें और ऊपर की तरफ उन्हें मोड़ते हुए, उसके घुटनों को हल्के से पेट पर दबाएं। इससे उसे पेट के अंदर की गैस को निकालने में मदद मिलेगी।
  • शिशु की छाती से जांघों तक लंबे हाथ फेरते हुए आगे की मालिश पूरी करें। अपना एक हाथ आड़ा करके शिशु की छाती पर रखें, और लंबा हाथ फेरते हुए नीचे की तरफ आएं। यही समान प्रक्रिया दूसरे हाथ के साथ भी करें और ऐसा कुछ बार दोहराएं।
  • शिशु की पीठ की मालिश करने के लिए उसे पेट के बल लिटाइए। घड़ी की सुई की दिशा के विपरीत बड़े गोलाकार अंदाज में शिशु के नितंबों से ऊपर पीठ की तरफ जाएं और फिर कंधों तक मालिश करें। शिशु की रीढ़ की हड्डी को न दबाएं, इससे शिशु को तकलीफ पहुंच सकती है।
  • जैसा कि आपने आगे की तरफ किया था, वैसे ही पीछे भी कंधों से पैरों तक लंबा हाथ फेरते हुए पीठ की मालिश पूरी करें।https://www.youtube.com/channel/UCvhlWPVRurKJ0-Sdj0qfFQg

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