Wednesday, 25 October 2017

2. माँ के दूध फायदे

* माँ के दूध फायदे  *


शिशु के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है। मां के दूध से शिशु को पोषण के साथ-साथ रोगों से लड़ने की शक्ति भी मिलती है। पहले छह महीने तक बच्चों को केवल स्तनपान पर ही निर्भर रखना चाहिए। सुपाच्य होने के कारण मां के दूध से शिशु को किसी भी तरह की पेट की गड़बड़ी होने की आशंका नहीं होती है। मां का दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। इसलिए यह आपके शिशु के जीवन के लिए जरूरी है।इतना ही नहीं स्तनपान सिर्फ आपके शिशु के लिए ही नहीं बल्कि आपके लिए भी फयदेमंद है। स्तनपान कराने वाली महिलाएं रोगमुक्त रहता है

शिशु को फायदे -

एक साल से कम उम्र के शिशु में डायरिया रोग से लड़ने की क्षमता कम होती है। मां का दूध उन्हें इस रोग से लड़ने की क्षमता देता है। मां के स्तन से पहली बार निकलने वाला दूध के साथ गाढ़ा पीले रंग का द्रव भी आता है, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं, इसे शिशु को जरूर पिलाएं। इससे शिशु को संक्रमण से बचने और उसकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलती है।मां का दूध शिशु के लिए सुपाच्य होता है। इससे बच्चों पर चर्बी नहीं चढ़ती है। स्तनपान से जीवन के बाद के चरणों में रक्त कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है।मां का दूध का बच्चों के दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। इससे बच्चों की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है।स्तनपान कराने वाली मां और उसके शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता बहुत मजबूत होता है।मां का दूध शिशु को उसी तापमान में मिलता है, जो उसके शरीर का है। इससे शिशु का सर्दी नहीं लगती है।एक महिने से एक साल की उम्र में शिशु में SIDS (अचानक शिशु मृत्यु संलक्षण) का खतरा रहता है। मां का दूध शिशु को इससे बचाता है। जिन शिशु को टीकाकरण से ठीक पहले अथवा बाद में स्तनपान कराया जाता है, उनमें तकलीफ के कम लक्षण पाए जाते हैं।

मां को होने वाले फायदे -

स्तनपान कराने से मां को गर्भावस्था के बाद होने वाली शिकायतों से मुक्ति मिल जाती है। इससे तनाव कम होता है और प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव पर नियंत्रण पाया जा सकता है।इससे माताओं को स्तन या गर्भाशय के कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही स्तनपान एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक है।खून की कमी से होने वाले रोग एनिमिया का खतरा कम होता है।मां और शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है। बच्चा अपनी मां को जल्दी पहचानने लगता है।स्तनपान के लिए आप अधिक कैलोरी का इस्तेमाल करती हैं और यह प्राकृतिक ढंग से वजन को कम करने और मोटापे से बचने में मदद करता है।स्तनपान करानेवाली माताओं को स्तन या गर्भाशय के कैंसर का खतरा कम होता है। स्तनपान एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक है।


बच्‍चों को बनाना है तंदुरुस्त, तो उन्हें खिलाएं ये चीजें -




QUICK BITES:



  • बच्‍चों की तंदरूस्‍ती के लिए खिलएं ये  फूड।
  • बच्चों को बनाएं सेहतमंद।
  • बच्चों का स्वास्थ्य है जरूरी।


बच्चे आमतैर पर खाने-पाने के मामले में काफी लापरवाह होते हैं। ये उनके पैरेंट्स की जिम्मेदारी होती है कि अपने बच्चों के आहार को लेकर वे सजग रहें। बच्चों को संपूर्ण पोषण मिलना बेहद जरूरी है। बच्चों को हर रोज विटामिन्स, मिनरल्स, फैट और प्रोटीन का संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए। यह उनके शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। कई माता-पिता अपने बच्चों के वजन को लेकर काफी चिंतित पाए जाते हैं। अगर बच्चों को नियमित रूप से पर्याप्त पोषण मिले तो उनका वजन संतुलित रहता है। चलिए, जानते हैं कि बच्चों के आहार में किन चीजों को शामिल कर उनके वजन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है।

1. घी या मक्खन

घी और मक्खन फैट से भरपूर खाद्य है। बच्चों को नियमित रूप से इसका सेवन कराना चाहिए। दाल अथवा रोटी में लगाकर इसका सेवन किया जा सकता है।

2. दाल

दालें प्रोटीन की सबसे बड़ी स्रोत हैं। दाल के पानी में भी पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। अगर आपका बच्चा कमजोर है तो उसका वजन बढ़ाने के लिए उसे नियमित रूप से दाल का पानी पीने को दें। इससे बच्चों का वजन तेजी से बढ़ता

3.मलाई वाला दूध

मलाई वाले दूध में पर्याप्त मात्रा में वसा पाया जाता है। बच्चों का वजन बढ़ाने के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है। अगर बच्चा दूध पीने से मना करता है तो शेक या फिर चॉकलेट पाउडर मिक्स करके उसे पिलाने की कोशिश करें।

4.केला शेक

केला एनर्जी का बेहतरीन स्रोत है। कमजोर बच्चों के लिए यह बेहद फायदेमंद होता है। केले का शेक या दूध और केला बच्चे को खिलाने से उनके वजन में वृद्धि होती है।

5. शकरकंद

शकरकंद फाइबर ,पोटेशियम, विटामिन ए, बी और सी से भरपूर होता है, जो बच्चों के वजन को बढ़ाने में काफी मदद करता है। कमजोर बच्चों को इसका हलवा या फिर उबाल कर दूध में मिलाकर खिलाया जा सकता है।

6. अण्डा एवं आलू

आलू में कार्बोहाईड्रेट और अंडे में प्रोटीन काफी मात्रा में पाया जाता है। कमजोर बच्चों का वजन बढ़ाने के लिए इनका सेवन बेहद जरूरी है। बच्चों को आलू या अंडा उबाल कर खिलाने से वजन बढ़ता है।

7. हरी सब्जियां

हरी सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इसके अलावा इनमें पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने की भी क्षमता होती है। बच्चों को इनका नियमित सेवन करना चाहिए। वजन बढ़ाने के अलावा भी इनके अनेक फायदे होते हैं


स्वास्थ्य के साथ ही शिशु के मुंह की सफाई 


QUICK BITES:
1. स्वास्थ्य के साथ ही शिशु की सफाई।
2. शिशु के मुंह की सफाई भी है जरूरी।
3. घर पर ही करें शिशु के मुंह की सफाई।

छोटे बच्चों की परवरिश करना वाकई बहुत कठिन काम है। क्योंकि अगर बचपन में ही उनकी परवरिश में कोई कमी रह जाए तो उसका खामियाजा जिंदगी भर भुगतना पड़ता है। नवजात शिशु की देखभाल विशेष तौर पर ज्यादा कठिन होती है। खासकर अगर इन शिशुओं के दांत निकल रहें हैं तो उनके मुंह की सफाई के लिए एक्स्ट्रा समय निकालने की जरूरत होती है। विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं कि दांतों के निकलने के साथ ही शिशुओं के दांतों और जीभ की सफाई शुरू कर देनी चाहिए। लेकिन शिशु का मुंह साफ करने से पहले उसे अच्छे से गोद में रखने की जरूरत है। आज हम आपको शिशु के दांत साफ करने के तरीके बता रहे हैं

कैसे करें शिशु के दांत साफ ?

अगर शिशु बहुत छोटा है तो जबरदस्ती उसके मुंह में कोलगेट ना डालें। ऐसा तब तक करें जब तक शिशु अ पनी इच्छा से पानी को मुंह से बाहर निकालने ना लगे।जब तक शिशु का दांत नहीं निकल जाता उसके मसूड़ों को साफ काटन के कपड़े से पोछ कर साफ करें। किसी कठोर चीज से मसूड़े साफ करने पर रैशेज और सूजन आने का खतरा रहता है।इस बात का खास तरह से ध्यान दें कि जैसे ही शिशु का पहला दांत निकले, बच्ची को गुनगुने पानी से ब्रश कराएं।अगर आप शिशु को अपना ही दूध पिलाती हैं और आप महसूर कर रही हैं कि शिशु आपके निप्पल को हल्का हल्का काट रहा है तो समझ लें कि शिशु के दांत जल्द ही आने वाले हैं।

मुंह साफ कैसे करें

टूथपेस्ट कई केमीकल से मिलकर बनता है जिसे शिशु का शरीर स्वीकार नहीं कर पाता है। इसलिए ध्यान रखें कि शिशु के मुंह में टूथपेस्‍ट लगी न रह जाए। इस कारण बच्‍चे का मुंह अच्‍छी तरह से साफ करें। बच्‍चे के मुंह धोने संबंधी सारी प्रक्रिया बहुत ही आराम से होनी चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि बच्‍चा इस प्रक्रिया से इतना घबरा जाए कि अगली बार आपको सहयोग ही न दे। इस बात के लिए भी तैयार रहें कि बच्‍चा आपकी उंगली पर काट भी सकता है।

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1. नवजात शिशु की देखभाल कैसे हो

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    नवजात शिशु की देखभाल कैसे हो -


  1. शिशुओं के 1 से 28 दिनों के बीच की देखभाल "नव प्रसव देखभाल" है।जन्‍म के समय कमज़ोर बच्चों को होती है विशेष देखभाल की जरूरत।कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली शिशु में होती है संक्रमण की अधिक संभावना। शिशु के लिए फायदेमंद है माँ का पौष्टिक भोजन लेना।
  2. "नव प्रसव देखभाल" या नवजात देखभाल शब्द नवजात शिशुओं के 1 से 28 दिनों के बीच की देखभाल के लिये इस्तेमाल होता है। जन्‍म के 1 से 28 दिनों में सभी शिशुओं को अतिरिक्‍त‍ देखभाल की जरूरत होती है और यह देखभाल ही बच्चे के संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य निर्धारित करती है। लेकिन जो बच्चे जन्‍म के समय कमज़ोर होते हैं, उन्हे विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
  3. खासकर वो बच्‍चे जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनको संक्रमण होने की अधिक संभावना होती है, इसलिए उन्हे शुरू के 28 दिन के दौरान अधिक से अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है।
  4. थोड़े सा ध्यान देकर 'बच्चे का जीवन बचाया जा सकता है और थोड़ी सी लापरवाही भी नवजात शिशु के लिए घातक हो सकती है. नवजात देखभाल समय से पहले जन्मे बच्चे, कम वजन के बच्चे या जो बच्चे अपने नियत तारीख से पहले पैदा होते हैं दी जाती है। 
  5. अगर बच्चा कमजोर है या उसकी चिकित्‍सा चल रही है, तो उसे सुरक्षा के लिए नवजात देखभाल में रखा जाता है। मूल रूप से बच्चे के स्वास्थ्य और आवश्यकताओं के अनुसार अस्पताल के विभागो को कुछ श्रेणियों में बांटा जाता है।
  6. श्वास लेने में समस्या, अविकसित, कम वजन का, प्रतिरक्षा प्रणाली विकार जैसी समस्या के साथ पैदा हुए शिशुओं को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इसको गहन देखभाल भी कहा जाता है। बच्चे के स्वास्थ्य की स्थिति पर नव प्रसव देखभाल कुछ दिनो से कुछ हफ्तों तक रहना निर्भर कर सकता हैं। 
  7. जिन बच्चों को इन्क्युबेटर मशीन पर रखा जाता है, उनको विशेष देखभाल की जरूरत है और उनको रोगाणुहीन दस्ताने पहने बिना स्पर्श की अनुमति नहीं होती. क्योकि उनमें संक्रमण की अधिक संभावना होती है। नवजात देखभाल के कुछ चरणों में मां को अपने बच्चे को स्तनपान कराने की अनुमती दी जाती है। नर्स को भी नवजात देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। यह बच्चे को किसी भी संक्रमण से पूर्ण रुप से सुरक्षित रखने की प्रक्रिया है ।

 नवजात देखभाल महत्वपूर्ण क्यों है?


सभी नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत है, चाहे वह स्वस्थ हो या अस्वस्थ। हर मां को अपने बच्चे को स्तनपान ज़रूर कराना चाहिये क्योकि एक नवजात शिशु के लिए यह पोषक तत्वों का सबसे अच्‍छा स्रोत है, जो बच्चे के विकास में मदद करता है।




 नवजात देखभाल का यह पहला पहलू है। यह बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए और भविष्य में सभी संक्रमणों से लड़ने में सहायक होता है। स्तनपान के विभिन्न फायदे हैं। वो माताओं जो पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित है मानती है और यह मानती हैं कि उन्‍हें अपने बच्चे को स्तनपान नही कराना चाहिये, यह एक पूरी तरह से गलत अवधारणा है।

कुछ मामलों में, माता-पिता को नव प्रसव देखभाल के दौरान कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। एक शिशु के माँ और पिता को अपने नवजात देखभाल से संबंधित सभी संदेह स्पष्ट करने चाहिए।

नवजात देखभाल के दौरान एक माँ को भी पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी जाती है, जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। नवजात देखभाल में एक माँ को बच्चे की आवश्यकता पर ध्यान देना पडेगा। साथ ही एक माँ को ये भी पता होना चाहिये कि किन परिस्थितियों में उसको तुरंत एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए।

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