बच्चों की सर्दी-खांसी जड़ से ख़त्म करेंगें ये घरेलू उपाय
प्रत्येक वर्ष सैकड़ों नवजात एवं छोटे बच्चे, विशेषतः कमजोर प्रतिरक्षा-तन्त्र की कमजोरी के कारण, सर्दी-खांसी का शिकार होते हैं । वस्तुतः अधिकतर शिशु, अपने जीवन के प्रथम वर्ष में ही लगभग सात-बार इस समस्या से दो-चार होते हैं
बच्चे संक्रमित वायु, सतह या किसी संक्रमित व्यक्ति की समीपता के कारण, विभिन्न प्रकार के संक्रमण फैलाने वाले रोगाणुओं के संपर्क में आ जाते हैं। बीमार बच्चे की देखरेख, माँ-बाप एवं उनकी देखभाल करने वालों के लिए समान रूप से मुश्किल हो सकती है ।
अमेरिकन बाल-रोग अकादमी, छः वर्ष से कम आयु के बच्चों को सर्दी-खांसी की दवाईयां ना देने की सलाह देती है । क्योंकि, इन दवाईयों से घातक दुष्परिणामों की सम्भावना होती है । इन विपरीत परिस्तिथियों में प्राकृतिक तरीकों से ही उपचार करना श्रेष्ठ है । घरेलू उपचार बच्चों की सर्दी-खांसी में राहत पहुंचा कर उनके प्रतिरक्षा-तंत्र को शक्तिशाली बनाते हैं ।
फिर भी, अगर आपका शिशु तीन-माह से कम आयु का है और ज्वर से ग्रसित है तो सदैव अपने चिकित्सक से परामर्श लें। बच्चों की सर्दी-खांसी में कारगर नौ शीर्ष उपचार:
छोटे बच्चों का बुखार कम करने एवं शरीर के तापमान को विनियमित करने हेतु,
उन्हें दिन में दो से तीन बार ठन्डे पानी से अथवा स्पंज-स्नान करवाएं ।
स्पंज को कमरे के तापमान के बराबर-तापमान वाले पानी में भिगोकर उसका अतिरिक्त पानी निचोड़ लें ।
और फिर बच्चे के तापमान को कम करने के लिए उसके हाथ-पैर, कांख एवं उसके कमर से नीचे के हिस्से को पोंछे ।
एक अन्य विकल्प के तहत आप बच्चे के माथे पर गीली पट्टियां भी रख सकते हैं । गीली पट्टियों को कुछ-एक मिनटों के अंतराल पर बदलते रहें ।
नोट: अत्यधिक ठन्डे पानी का इस्तेमाल ना करें यह शरीर के आंतरिक तापमान में बढ़ोतरी कर सकता है ।
एक कढाई में चार-नींबू का रस, उनके छिलके और एक चम्मच अदरक की फांके लें । इसमें पानी डालें ताकि सारे के सारे अवयव इसमें डूब जाएँ। इसे ढक कर 10 मिनट तक काढें । इस प्रकार तैयार पानी को अलग कर लें। अब इस तरल पेय में उतनी ही मात्र में गर्म-पानी तथा स्वाद के लिए शहद मिलाएं। बच्चे को इस प्रकार तैयार गर्म नींबू-पानी दिन में कुछ-बार पीने को दें।
नोट: एक-वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए चीनी के स्थान पर शहद मिलाएं ।
एक-वर्ष या फिर उससे कम आयु के बच्चों के लिए, जोकि सर्दी-खांसी से पीड़ित हों, शहद एक सुरक्षित उपचार है । दो चम्मच कच्चा शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिला लें । हर, कुछ एक घंटों के अंतराल के बाद राहत दिलाने के लिए पिलायें । एक गिलास गर्म-दूध, शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी एवं सीने के दर्द में राहत मिलती है ।
एक वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए गर्म चिकन का सूप भी एक अच्छा विकल्प है । यह हल्का एवं पोषक होता है, तथा छाती जमने और नाक बंद होने से छुटकारा दिलाता है । इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट ठीक होने की प्रक्रिया को अधिक तेज कर देते हैं । आप बच्चों को दिन में दो से तीन बार यह सूप दे सकते हैं ।
संतरे में मौजूद विटामिन-सी श्वेत रक्त कोशिकाओं का निर्माण बढाने में सहायक है । यही कोशिकाएं सर्दी-जुकाम के रोगाणुओं से लडती है । संतरा प्रतिरक्षा-तंत्र को दृढ़ता प्रदान करके खासी, गले की दर्द और नाक बहने की समस्या में राहत पहुंचाता है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे को प्रतिदिन एक से दो गिलास संतरे का रस पिलायें। इससे कम आयु के बच्चों को बराबर मात्रा में पानी मिलाकर नियमित अंतराल के बाद पिलायें। बड़े बच्चों को, विटामिन-सी की ख़ुराक अधिक करने के लिए, संतरे खाने को दिए जा सकते हैं।
छः कप पानी में, आधा कप बारीक कटे हुए अदरक की फांके और दालचीनी के दो छोटे टुकड़ों को 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकायें । फिर इसे छानकर चीनी या शहद मिलाकर दिन में कई बार बच्चे को पीने के लिए दें । एक वर्ष से कम आयु के बच्चों को बराबर मात्रा में गर्म-पानी मिलाकर पिलायें
एक हिस्सा कच्चा, बिना छाना हुआ सेब का सिरका और दो हिस्से ठंडा पानी मिलाकर उसमें दो पट्टियां भिगोयें । फिर उन्हें निचोड़कर एक को माथे पर और एक को पेट पर रखें । दस- दस मिनट के बाद पट्टियां बदलते रहें । प्रक्रिया को बुखार कम होने तक दोहरायें ।
स्तनपान बच्चों के लिए अति महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे बीमार हों । यह उन्हें अदभुत संतुलित पोषक-तत्वों की श्रृंखला प्रदान करता है । जोकि उन्हें संक्रमण से लड़ने और शीघ्र स्वस्थ होने में सहायता करते हैं । छः माह से कम आयु के शिशुओं को, सर्दी-खांसी से निजात दिलवाने के लिए, स्तनपान कराना चाहिए ।
सुनिश्चित करें की आपके बच्चे को भरपूर तरल-पदार्थ मिलें । अन्यथा वह निर्जलीकरण का शिकार हो सकता है, जिससे समस्या अधिक गंभीर हो सकती है । शरीर में पानी का उचित स्तर, मल -निकास को पतला करके आपके बच्चे के शरीर से कीटाणुओं का निकास करने में और बंद-नाक,छाती जमने आदि की समस्या से बचाता है
बच्चों को सर्दी और जुकाम से बचाब
अपने शिशु को पहली बार सर्दी-जुकाम से परेशान होते हुए देखना आपके लिए भी तकलीफ भरा हो सकता है। शिशु को बेचैनी सी रहेगी और वह नाक सुड़कता रहेगा। उसे स्तनपान करने में भी मुश्किल हो सकती है। मगर, आप उसकी ये तकलीफ दूर करने के लिए काफी कुछ कर सकती हैं।
आप फिक्र न करें, इसे आमतौर पर साधारण सर्दी-जुकाम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह काफी आम है और सामान्यत: यह ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं होती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आपके शिशु को पहले दो सालों में आठ से 10 बार सर्दी-जुकाम होगा। इसका मतलब है कि आपकी बहुत सी रातें जुकाम से परेशान शिशु की देखभाल में गुजरेंगी
सर्दी-जुकाम किस वजह से होता है?
सर्दी-जुकाम मुंह, नाक और गले का इनफेक्शन है, जो कि बहुत से अलग-अलग विषाणुओं में से किसी एक की वजह से होता है। शिशुओं को जुकाम ज्यादा इसलिए होता है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षण प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती। वह अभी संक्रमणों से लड़ने की शक्ति विकसित कर रही होती है।
जब सर्दी-जुकाम से ग्रस्त कोई व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो जुकाम के विषाणु हवा में फैल जाते हैं और किसी अन्य व्यक्ति में सांस के जरिये अंदर पहुंच जाते हैं। इसी तरीके से जुकाम एक से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। ये विषाणु हाथ से हाथ के संपर्क से भी फैलते हैं। इसलिए नाक छिनकने के बाद हमेशा अपने हाथ धोएं।
जुकाम शिशु को किस तरह प्रभावित करता है?
अगर आपके शिशु को जुकाम है, तो आपको निम्नांकित लक्षणों में से कुछ दिखाई दे सकते हैं:
101 डिग्री फेरनहाइट तक बुखारखांसीआंखे लाल हो जानागले में खराशकान में दर्दश्लेम (म्यूकस) से भरी और बहती नाकचिड़चिड़ापन और बेचैनीभूख न लगनालसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) में सूजन (बगल में, गर्दन पर और सिर के पीछे)
अगर, शिशु की नाक में श्लेम भरा हो, तो उसे नाक से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में शायद उसे स्तनपान करवाना भी मुश्किल हो। आमतौर पर बच्चे करीब चार साल की उम्र से पहले अपनी नाक छिनकना नहीं जान पाते, इसलिए आपको नाक से श्लेम निकालने में शिशु की मदद करनी होगी।
हो सकता है आपका शिशु अब बिना जगे पूरी रात सोने लग गया हो। ऐसे में जुकाम के दिनों में बेचैनी के कारण उसका रात में बार-बार उठना, आपको उसके जन्म के पहले कुछ हफ्तों की याद ताजा करा देगा!
सर्दी-जुकाम से बेचैनी और सांस लेने में तकलीफ की वजह से रात में वह शायद बहुत बार उठेगा। तैयार रहें, आपको भी रात को शिशु को आराम दिलाने और उसकी नाक पौंछने के लिए जागना होगा।
सामान्यत: सर्दी-जुकाम कितने समय तक रहता है?
जुकाम के लक्षण आमतौर पर तीन से 10 दिनों बाद कम होने लगते हैं, हालांकि बहुत छोटे शिशुओं में ये दो हफ्ते तक जारी रह सकते हैं। जो शिशु, बड़े बच्चों के संपर्क में ज्यादा रहते हैं, उन्हें अपने पहले साल में करीब छह से 10 बार जुकाम होता है। हो सकता है आपको उनकी नाक सर्दी के मौसम में हर समय बहती ही नजर आए।
अगर आपका बच्चा डेकेयर सेंटर या प्ले स्कूल जाता है, तो उसे एक साल में 12 बार भी सर्दी-जुकाम लग सकता है!
क्या मैं शिशु को सर्दी-जुकाम होने से बचा सकती हूं?
शिशु को स्तनपान करवाना उसके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के बेहतरीन उपायों में से एक है। इससे शिशु को आपके रोग-प्रतिकारक (एंटीबॉडीज, संक्रमण से लड़ने के लिए आपके शरीर में मौजूद रसायन) मिलते हैं। शिशु की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यह पक्का उपाय नहीं है, मगर स्तनपान करने वाले शिशु सर्दी-जुकाम और अन्य इनफेक्शन से बेहतर बचाव कर पाते हैं।
शिशु का संक्रमणों से बचाने के लिए बेहतर तो यही है कि उसे बीमार व्यक्ति से दूर रखा जाए। या फिर आप उन्हें शिशु को पकड़ने या उसकी चीजों को छूने से पहले हाथ धोने के लिए कहें।
अगर आप या आपके पति धूम्रपान करते हैं, तो इसे बंद कर देना शिशु के लिए अच्छा रहेगा। धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ रहने वाले शिशुओं को ज्यादा जुकाम होता है और यह काफी लंबा चलता है। वहीं धूम्रपान के धुएं से दूर रहने वाले शिशुओं को धुएं के संपर्क में रहने वाले शिशुओं की तुलना में कम जुकाम होता है। शिशु को ऐसी जगहों पर भी ले जाने से भी बचें, जहां कोई धूम्रपान कर रहा हो।
शिशु को सर्दी-जुकाम होने पर डॉक्टर से कब बात करनी चाहिए?
अगर आपके शिशु की उम्र तीन महीने से कम है, तो बीमारी के पहले लक्षण दिखाई देने पर ही उसे डॉक्टर के पास ले जाएं, जैसे कि:
उसका जुकाम तीन दिन से ज्यादा रहेउसका बुखार 100.4 डिग्री फेरनहाइट से ज्यादा हो जाएउसे सांस लेने में परेशानी हो रही होउसकी खांसी ठीक न हो रही होवह अपने कान खुजाता रहता है और चिड़चिड़ा हो गया है - यह कान में संक्रमण का संकेत हो सकता हैउसके खांसने पर हरा, पीला या भूरा श्लेम निकल रहा है या फिर उसकी नाक से श्लेम निकल रहा है
सर्दी-जुकाम का यदि उचित इलाज न कराया जाए, तो इससे गंभीर जीवाण्विक (बैक्टिरियल) इनफेक्शन जैसे कि निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, फ्लू या कान का संक्रमण हो सकता है।
मैं सर्दी-जुकाम का उपचार कैसे कर सकती हूं?
शिशु का जुकाम अपने आप ठीक हो जाएगा। मगर, आप उसकी परेशानी को कम करने के लिए कुछ कदम उठा सकती हैं, जैसे कि:
सुनिश्चित करें कि आपके शिशु को पर्याप्त आराम मिले।
शिशु को ज्यादा बार स्तनपान या बोतल से दूध पीने के लिए प्रोत्साहित करें। अगर आपका शिशु फॉर्मूला दूध पीता है या ठोस आहार ले रहा है, तो आप उसे पानी भी दे सकती हैं। आप विटामिन सी से भरपूर फलों के रस भी ज्यादा मात्रा में दे सकती हैं। ये सब उसे जलनियोजित रखेंगे और यदि बुखार हो, तो उसे भी कम करते हैं।
अगर शिशु को बुखार हो, तो आप डॉक्टर के निर्देश पर उसे पैरासिटामोल सस्पेंशन भी दे सकती हैं। मगर, यह उसे तीन महीने का या इससे बड़ा हो जाने पर ही दे सकती हैं। शिशु को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर से अवश्य पूछ लें। सर्दी-जुकाम का कोई भी घरेलू उपचार डॉक्टर से बिना पूछे न करें। डॉक्टरी पर्ची के बिना मिलने वाली सर्दी-जुकाम की दवाएं एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। हालांकि जुकाम से राहत के लिए दवाइयां भी गैर औषधीय सिरप से कुछ ज्यादा असरदार नहीं पाई जातीं हैं।
अगर, आपके शिशु की नाक बंद हो, तो गद्दे के सिराहने पर नीचे एक-दो पुराने तौलिये लगाकर उसे थोड़ा ऊंचा उठा दें। तकियों से दम घुटने का खतरा हो सकता है, इसलिए शिशु का सिर ऊंचा करने के लिए तकियों का इस्तेमाल न करें।
आपका शिशु अभी अपनी नाक नहीं छिनक सकता। इसलिए आप उसकी नाक पौंछती रहें, ताकि उसे सांस लेने में आसानी हो। आप शिशु के नथुनों के बाहर थोड़ी सी पैट्रोलियम जैली भी लगा सकती है, ताकि त्वचा की संवेदनशीलता कम हो सके।
अगर शिशु को नाक में श्लेम भरा होने की वजह से स्तनपान करने में मुश्किल हो रही हो, तो आप उसके डॉक्टर से नाक में डालने वाली लवणयुक्त ड्रॉप्स (सैलाइन ड्रॉप्स) के बारे में पूछ सकती हैं। आप घर पर भी लवणयुक्त पानी तैयार कर सकती हैं। उबालकर ठंडे किए गए 30 मि.ली. पानी में चुटकी भर नमक मिलाने पर यह पानी तैयार हो जाता है। इस पानी के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और इसे दिन में कई बार आराम से इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ माता-पिता शिशु की नाक में नमक का पानी डालने के बाद सक्शन बल्ब के इस्तेमाल से श्लेम बाहर निकाल लेते हैं।
भाप से भी शिशु की नाक में भरे श्लेम को ढीला करने में मदद मिल सकती है। मगर, शिशु को गर्म, भाप वाले पानी के ज्यादा नजदीक न लाएं, इससे उसके जलने का खतरा रहता है। भाप दिलवाने का एक सुरक्षित तरीका यह है कि उसे अपने साथ बाथरूम में ले जाएं। गर्म पानी का शावर चालू करें, दरवाजे को बंद कर लें और भापयुक्त बाथरूम में कुछ मिनटों तक बैठे रहें। इस तरीके से भाप दिलवाने के बाद शिशु के कपड़े अवश्य बदल दें।
वेपर रब लगाने से भी शिशु को सांस लेने में आसानी हो सकती है। इसे शिशु की छाती और पीठ पर लगाएं। शिशु के नथुनों पर इसे न लगाएं, क्योंकि इससे सांस लेने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
अगर, आपके शिशु की केवल नाक बंद हो, और बाकी अन्य कोई लक्षण न हों, तो देख लें कि कहीं शिशु के नथुनों में कुछ और चीज तो नहीं फंस गई है। छोटे शिशु भी अपनी नाक में कुछ डालने में माहिर हो सकते हैं।।
सर्दी-जुकाम जीवन की सच्चाई है। शिशु की पहली जुकाम को देख लेने के बाद, आप शिशु की अगली जुकाम के लिए तैयार हो जाएंगी। आपको पता होगा कि जुकाम होने पर क्या हो सकता है।
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